मायावती के साथ से कांग्रेस को हो सकता है इन राज्यों में फायदा

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2014 के लोकसभा चुनावों के बाद कई सारे चुनाव में एक के बाद एक कांग्रेस की हार होती हुई देखी गई। चाहे वो किसी भी राज्य में हुआ विधानसभा चुनाव हो कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। पंजाब को छोड़ दें तो कांग्रेस ने हर मोर्च पर निराश ही किया और भाजपा ने सबको चौंकाते हुए एक के बाद एक चुनाव जीत लिये।

पर, अभी हाल ही में हुआ कर्नाटक का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक सीख की तरह सामने आया। यहां पर कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी रही, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर ही कर दिया। जेडीएस से हाथ मिलाया कांग्रेस ने और खुद से कम सीटें होने के बावजूद कांग्रेस ने जेडीएस को सीएम पद ऑफर कर दिया।

इस साल के आखिर मे तीन बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। देर आए तो दुरुस्त आए। कांग्रेस ने वही चाल चलने की सोच ली है, जो कि अभी कुछ साल पहले भाजपा ने चली और कई सारे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को धूल चटा दी।

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस के सामने इन तीनों राज्यों में भाजपा है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा इन राज्यों में और कोई पार्टी नहीं है जो कि दोनों पार्टियों को टक्कर दे सके।

लेकिन इन तीनों राज्यों में कांग्रेस अगर किसी पार्टी से हाथ मिला सकती है तो वो है मायवती की पार्टी बसपा से। बसपा का इन तीनों राज्यों में ज़्यादा प्रभुत्व तो नहीं है, पर दलितों के कई ऐसे वोट हैं, जो कि कांग्रेस और बसपा के गठबंधन के बाद कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकती है।

कर्नाटक में यही हुआ था। जेडीएस ने बसपा से हाथ ही इसलिए मिलाया था कि जो भी 5-10 हज़ार वोट बसपा का उम्मदवार काट ले जाता था, वो सारे गठबंधन करने के बाद जेडीएस के खाते में आ गए। बसपा का वोट बैंक छत्तीसगढ़, राज्सथान और मध्यप्रदेश में चार से पांच प्रतिशत है, जो कि कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकता है।

बसपा के लिए भी कांग्रेस से हाथ मिलाना फायदेमंद हो सकता है। कांग्रेस से हाथ मिलाने के बाद बसपा के खाते में कुछ एक सीटें तो आ ही सकती हैं। इन तीनों राज्यों में भाजपा की फिलहाल सरकार है और कहा जा रहा है कि तीनों ही राज्यों मे भाजपा सरकार से जनता निराश है।