राजस्थान में अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत बच्चों को स्कूलों में पिलाया जायेगा दूध

0
1088

राजस्थान सरकार द्वारा ‘अन्नपूर्णा रसोई’ की तर्ज पर अब ‘अन्नपूर्णा दूध योजना’ शुरू करने का ऐलान किया है। प्रदेश की वसुंधरा राजे सरकार राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए 2 जुलाई से अन्नपूर्णा दूध योजना की शुरुआत की गयी, इस महती योजना का राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने उद्घाटन किया। शुरुआत में यह योजना 8वीं कक्षा तक के बच्चों पर लागू होगी। जिसकी समीक्षा के बाद बची हुई चार कक्षाओं के लिए भी बढ़ाया जा सकता है।

विद्यार्थियों को 200 एमएल दूध प्रतिदिन दिया जाएगा

शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए इस योजना की शुरुआत की जा रही है। 2 जुलाई को इस विशेष योजना के तहत कक्षा एक से 5 तक के बच्चों को 150 एमएल पिलाया जाएगा। उससे ऊपरी कक्षाओं, कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को 200 एमएल दूध प्रतिदिन दिया जाएगा।

दूध के वितरण का प्रबंध विद्यालय प्रबंध समितियां करेंगी। विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को दूध के जरिए पोषण प्रदान करने की इस योजना में सहयोग के लिए भामाशाहों से भी सहायता करने की अपील की गई है।

राज्य में 80 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल

इस योजना में राज्य के करीब 85 लाख सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं में से लगभग 75 प्रतिशत को शामिल किया गया है। पहली कक्षा से 8वीं कक्षा तक यह योजना शुरू हो रही है। प्रदेश में 12वीं कक्षा तक करीब 85 लाख छात्र अध्यनरत हैं। राज्य में आज की तारीख में 80 हजार से ज्यादा सरकारी विद्यालय हैं।

दोपहर के खाने के लिए मिड डे मील योजना 

हालांकि, वर्तमान में पूरे राज्य में मिड डे मील योजना के तहत राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मध्यान्ह का भोजन दिया जा रहा है। इस योजना के रूप में कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों को सप्ताह में 6 दिन तक दोपहर का भोजन खिलाया जाता है । इस योजना के तहत सोमवार को रोटी, सब्जी, मंगलवार को चावल, दाल, सब्जी, बुधवार को रोटी, दाल,  गुरुवार को खिचड़ी दाल, चावल, शुक्रवार को रोटी, दाल और शनिवार को रोटी, सब्जी सरकारी स्कूल के बच्चों को दी जाती है । योजना में 4 रुपए 13 पैसे और कक्षा छह से आठवीं तक 6 रुपए 18 पैसे का ही बजट है। मिड डे मील बनवाने में खर्च दोगुना खर्च आता है, जोकि सात रुपए 55 पैसे से हैं।
नियम के मुताबिक कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन और कक्षा 6 से आठ तक के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटिन होना जरूरी  है। इसके अलावा सप्ताह में एक दिन बच्चों को मौसमी फल भी दिया जाने का प्रावधान है। यह योजना राजस्थान में वर्ष 2010 से चल रही है।

सीएम राजे ने दूध को लेकर किया था एक विज्ञापन

आपको याद दिला दें कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ही साल 2003 से 2008 के कार्यकाल में सरस डेयरी के लिए प्रचार करते हुए सभी अभिवाहकों से अपील करता हुआ एक विज्ञापन किया था। जिसमें सीएम राजे लोगों से अपने बच्चों को रोज एक ग्लास दूध जरूर पिलाए जाने की अपील कर रहीं थीं। राजे की उस अपील का राज्य की जनता पर गहरा असर हुआ। किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह से अपील करता हुआ विज्ञापन संभवत: पहली बार किया गया था।

अन्नपूर्णा दूध योजना की विशेषताए

  •  कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को 150 मिलीलीटर दूध दिया जाएगा।
  •  कक्षा 6 से 8 के छात्रों को 200 एमएल स्कूलों में दूध प्रदान किया जाएगा।
  • मिडडेमील के भोजन के दौरान, सप्ताह में छह दिन दोपहर का भोजन दिया जाता है। इस योजना के तहत दूध सप्ताह में तीन दिन दिया जाएगा।
  • शहरी इलाकों में, गर्म दूध सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को और ग्रामीण क्षेत्रों में, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार या शहरी क्षेत्रों के समान प्रदान किया जाएगा।
  • इस योजना से बच्चों के नामांकन, उपस्थिति में वृद्धि, ड्रॉप आउट को रोकना व बच्चों के पोषण स्तर में वृद्धि करना है|
  • दूध की उपलब्धता शाला प्रबंधन समिति की ओर से होगी। पंचायत क्षेत्र में स्थित पंजीकृत महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से दूध खरीदा जाएगा।
  • इसके बाद पंजीकृत दुग्ध उत्पादक समितियों व सरस डेयरी से दूध खरीद की प्राथमिकता रहेगी।
  • शहरी क्षेत्र में शाला प्रबंधन समिति उच्च गुणवत्तापूर्ण पाश्च्यूरीकृत टोंड मिल्क सरस डेयरी बूथ से खरीदेगी।