कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका, अब बहुजन समाज पार्टी ने छोड़ा साथ

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बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्षा मायावती ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की बजाय अजीत जोगी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया हैं| मायावती का यह फैसला कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका हैं और यह पहली बार नहीं हुआ, कांग्रेस को इससे पहले भी कई बार सहयोगी दलों से मुँह की खानी पड़ी हैं|

एक दशक से भी अधिक समय से राजनीति में सक्रिय राहुल गाँधी सहयोगियों के साथ-साथ अपने ही दल के कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर नहीं रख पा रहे हैं और राहुल गाँधी की इस चूक का भारतीय जनता पार्टी ने भरपूर फायदा उठाया हैं| भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के बागी नेताओं को साथ लेकर उत्तरप्रदेश और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सत्ता में आयी हैं|

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर असर पड़ना स्वाभाविक हैं|इसी कारण से कांग्रेस नेता बसपा के साथ गठबंधन के लिए लालायित थे| छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और मध्य प्रदेश के अध्यक्ष कमलनाथ बसपा के साथ गठबंधन करने की इच्छा कई बार सार्वजनिक रूप से जाहिर कर चुके हैं|

इसके बावजूद कांग्रेस बसपा को अपने साथ नहीं रख पाई| अजीत जोगी कांग्रेस की नाक के नीचे से बसपा को अपने पाले में ले गए| राहुल गाँधी भले ही पूरे जोश के साथ घूम रहे हों और विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मायावती के साथ गठबंधन करने में सफल नहीं हो सकेऔर इसका खामियाजा कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों में उठाना भी पड़ सकता है |

इससे पहले भी कई चूक कर चुके हैं राहुल गाँधी –

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पहली बार चूक नहीं हुई है, इससे पहले कर्नाटक में भी जेडीएस के साथ गठबंधन कर पाने में असफल रहे थे| इसी का नतीजा था कि बीजेपी वहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, हालांकि बाद में त्रिशंकु विधानसभा के हालात होने के बाद बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई और इसी कारण कांग्रेस के पास जेडीएस से ज्यादा सीटें होने के बाद भी सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी|

त्रिपुरा में कांग्रेस और लेफ्ट के साथ मिलकर चुनाव न लड़ने का खामियाजा उसे भुगतना पड़ा था|

क्या ऐसे संभव हो पाएगा महागठबंधन –

सहयोगी दलों के साथ-साथ अपनी पार्टी के नेताओं को भी राहुल सहेजकर साथ नहीं रख सके, असम के हिमंता बिस्वा सरमा जैसे जमीनी नेता ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था| हिमंता बिस्वा के जरिए बीजेपी ने असम ही नहीं बल्कि पूर्वोत्तर में अपनी राजनीति को मजबूत किया है|

मोदी के खिलाफ राहुल गांधी का विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति पर लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं, 2019 में मोदी के खिलाफ अभी तक विपक्ष के गठबंधन का स्वरूप तय नहीं हो सका है|  जबकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और नरेंद्र मोदी दोबारा से सत्ता में वापसी के लिए रैली दर रैली कर रहे हैं|